वॉशिंगटन/मास्को: दुनिया पर एक बार फिर महायुद्ध का खतरा मंडराने लगा है। अमेरिका की नौसेना ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूस और वेनेजुएला से जुड़े एक विशाल तेल टैंकर ‘मैरिनेरा’ (पुराना नाम बेला-1) को नाटकीय ढंग से जब्त कर लिया है। अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद वैश्विक राजनीति में भूचाल आ गया है और दुनिया की तीन महाशक्तियां—अमेरिका, रूस और चीन—एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रही हैं।
अमेरिका की ‘दादागिरी’ पर भड़का रूस और चीन
अमेरिका के इस कदम पर रूस ने बेहद सख्त लहजे में जवाब दिया है। क्रेमलिन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और ‘समुद्री डकैती’ करार दिया है। रूस का कहना है कि अमेरिका खुलेआम ताकत का नाजायज इस्तेमाल कर रहा है। वहीं, चीन ने भी रूस का साथ देते हुए वॉशिंगटन पर ‘दादागिरी’ का आरोप लगाया है। बीजिंग ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की ऐसी हरकतें वैश्विक व्यापार और शांति के लिए बड़ा खतरा हैं।
एक जंग लगा जहाज और महाशक्तियां आमने-सामने
हैरानी की बात यह है कि एक पुराना और जंग लगा हुआ टैंकर अचानक से विश्व युद्ध की वजह बनता दिख रहा है। दरअसल, यह कोई मामूली जहाज नहीं है। अमेरिका का दावा है कि यह टैंकर एक ‘शैडो फ्लीट’ (Shadow Fleet) का हिस्सा है, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को धता बताकर वेनेजुएला और रूस के बीच अवैध तेल का व्यापार कर रहा था। इस जहाज पर प्रतिबंधों की अनदेखी और गंदी राजनीति के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसने इसे अंतरराष्ट्रीय विवाद का केंद्र बना दिया है।
क्या अब शुरू होगा समुद्री टकराव?
विशेषज्ञों की मानें तो यह मामला और भी बिगड़ सकता है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि अगर रूस या चीन अपने तेल शिपमेंट्स की सुरक्षा के लिए युद्धपोत (Warships) भेजना शुरू कर देते हैं, तो यह तनाव सीधे सैन्य टकराव में बदल सकता है। फिलहाल अमेरिका इस टैंकर को छोड़ने को तैयार नहीं है और रूस ने इसे अपने संप्रभु क्षेत्र पर हमला बताया है। खास बात यह है कि इस जहाज के क्रू में 3 भारतीय सदस्य भी शामिल हैं, जिससे भारत की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।