वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान में पिछले 47 सालों से चले आ रहे अयातुल्ला शासन के खात्मे को लेकर एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने पूरी दुनिया की राजनीति में भूचाल ला दिया है। ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ की एक ताजा रिपोर्ट ने दावा किया है कि ईरान पर अमेरिकी हमला केवल सुरक्षा कारणों से नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे क्षेत्रीय महाशक्तियों का ‘सीक्रेट गेम’ था।
खुफिया रिपोर्ट को ठुकरा कर ट्रंप ने किया हमला
हैरानी की बात यह है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को साफ तौर पर बताया था कि ईरान से अमेरिका को कोई सीधा या तत्काल खतरा नहीं है। इसके बावजूद ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया। रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले के पीछे इजराइल और सऊदी अरब की तरफ से बनाया गया जबरदस्त दबाव था, जिसे नजरअंदाज करना वॉशिंगटन के लिए मुमकिन नहीं था।
क्राउन प्रिंस सलमान का ‘डबल गेम’ और गुप्त कॉल
सबसे चौंकाने वाला खुलासा सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) को लेकर हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, सार्वजनिक मंचों पर शांति और कूटनीति की बात करने वाले प्रिंस सलमान पिछले एक महीने से ट्रंप के साथ गुप्त फोन कॉल्स पर संपर्क में थे। बंद दरवाजों के पीछे सऊदी अरब ने अमेरिका को ईरान पर सैन्य प्रहार के लिए उकसाया। उनका तर्क था कि अगर अभी ईरान को नहीं कुचला गया, तो भविष्य में वह पूरे मिडिल ईस्ट के लिए बेकाबू ताकत बन जाएगा।
इजराइल और सऊदी की ‘जुगलबंदी’ ने बदली रणनीति
मिडिल ईस्ट के दो कट्टर प्रतिद्वंद्वी, इजराइल और सऊदी अरब, इस मुद्दे पर एक साथ आ गए। रिपोर्ट कहती है कि दोनों देशों ने हफ्तों तक वॉशिंगटन में लॉबिंग की। उनका साझा डर था कि ईरान की बढ़ती ताकत भविष्य में सऊदी के तेल ठिकानों और इजराइल की सुरक्षा को तबाह कर सकती है। इसी डर ने अमेरिका को तेहरान के खिलाफ युद्ध के मैदान में धकेल दिया।
मीटिंग के बीच कैसे बिछाया गया खामेनेई का जाल?
वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया है कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को उस वक्त निशाना बनाया गया जब वे रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के टॉप कमांडरों के साथ एक महत्वपूर्ण सुरक्षा बैठक कर रहे थे। यह ऑपरेशन पूरी तरह से सटीक खुफिया जानकारी पर आधारित था, लेकिन इस पर ‘गो अहेड’ का फाइनल बटन सहयोगी देशों के दबाव में ही दबाया गया।
मुस्लिम देशों में बढ़ सकता है सऊदी के खिलाफ गुस्सा
इस खुलासे के बाद मुस्लिम जगत में सऊदी अरब की भूमिका को लेकर नाराजगी बढ़ना तय माना जा रहा है। एक तरफ शांति का दिखावा और दूसरी तरफ ईरान के खिलाफ सैन्य साजिश में शामिल होने की खबर ने मिडिल ईस्ट की राजनीति को बेहद जटिल बना दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह रिपोर्ट ईरान और सऊदी अरब के रिश्तों में कभी न भरने वाली खाई पैदा कर सकती है।