नई दिल्ली: इस बार 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर एक ऐसा नजारा दिखेगा जो पहले कभी नहीं देखा गया। सीआरपीएफ (CRPF) की 26 वर्षीय महिला असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला इतिहास रचने जा रही हैं। सिमरन इस बार सीआरपीएफ के पुरुष मार्चिंग दस्ते (Male Contingent) का नेतृत्व करेंगी। यह न केवल सीआरपीएफ के लिए, बल्कि बीएसएफ, आईटीबीपी और सीआईएसएफ जैसे तमाम केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के इतिहास में पहली बार हो रहा है जब कोई महिला अधिकारी पुरुष दस्ते की कमांडर बनी हैं।
वर्दी से है तीन पीढ़ियों का नाता
सिमरन बाला की रगों में देश सेवा का जज्बा विरासत में मिला है। एनबीटी से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि वह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं जो सेना या अर्धसैनिक बल के जरिए देश की सेवा कर रही हैं। उनके दादा तीरथ राम चौधरी सेना में सूबेदार थे और उनके पिता विनोद कुमार चौधरी भी सेना से रिटायर हुए हैं। बचपन से ही घर में दादा और पिता को वर्दी में देखकर सिमरन ने भी इसी राह पर चलने का सपना बुन लिया था।
बॉर्डर के पास बीता बचपन, पहले प्रयास में बनीं अफसर
सिमरन मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के नौशेरा की रहने वाली हैं, जो पाकिस्तान सीमा से महज 10 किलोमीटर दूर है। सीमा पार से होने वाली गोलाबारी और अशांत माहौल के बीच पली-बढ़ी सिमरन ने दुश्मनों को जवाब देने की ठानी थी। वह ‘लॉयन ऑफ नौशेरा’ के नाम से मशहूर महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान से बेहद प्रभावित रही हैं। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने 2021 में यूपीएससी (CAPF) की परीक्षा पहले ही प्रयास में पास की और देशभर में 82वीं रैंक हासिल की।
नक्सली मोर्चे पर तैनाती और कड़ी ट्रेनिंग
जनवरी 2024 में सीआरपीएफ ज्वाइन करने के बाद सिमरन ने कड़ी ट्रेनिंग ली, जहाँ उन्होंने तीन में से दो ‘बेस्ट ट्रॉफी’ अपने नाम कीं। वर्तमान में उनकी तैनाती छत्तीसगढ़ की खतरनाक ‘बस्तरिया बटालियन’ में है, जहाँ वह नक्सलियों के खिलाफ अभियानों में सक्रिय रूप से शामिल रहती हैं। अब वह देश की राजधानी में अपनी जांबाजी का प्रदर्शन करेंगी।
परेड के लिए पसीना बहा रहीं सिमरन
इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी को निभाने के लिए सिमरन पिछले साल 8 दिसंबर से ही लगातार मेहनत कर रही हैं। वह रोजाना 8 से 10 घंटे परेड की प्रैक्टिस करती हैं। सिमरन का कहना है कि उन्हें पूरी सीआरपीएफ का भरपूर सहयोग मिल रहा है और कर्तव्य पथ पर पुरुष दस्ते की पहली महिला कमांडर बनना उनके लिए गर्व का क्षण है।