नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में साइबर अपराधियों ने दुस्साहस की सारी हदें पार कर दी हैं। एक बुजुर्ग दंपती को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का झांसा देकर उनसे 14 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी कर ली गई है। दिल्ली पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले का पर्दाफाश करते हुए लखनऊ और वाराणसी समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से 8 मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि इस गिरोह के तार कंबोडिया और नेपाल जैसे देशों से जुड़े हुए हैं।
पढ़े-लिखे निकले ठग: गिरोह में पुजारी और CA भी शामिल
इस गैंग की सबसे चौंकाने वाली बात इसमें शामिल लोगों की प्रोफाइल है। दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपियों में वडोदरा का दिव्यांग पटेल शामिल है, जो CA (इंटरमीडिएट) पास है और एक NGO चलाता है। वहीं, गिरफ्तार कृतिक शितोले ने न्यूजीलैंड से IT में डिप्लोमा किया है। हद तो तब हो गई जब वाराणसी के एक पुजारी प्रद्युम्न तिवारी को भी पुलिस ने दबोचा, जो घाटों पर अनुष्ठान कराता था। इसके अलावा गिरोह में MBA डिग्री धारक और बैंक का पूर्व कर्मचारी भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, ये सभी पढ़े-लिखे लोग ठगी की रकम को ‘म्यूल’ (किराए के) बैंक खातों में ठिकाने लगाने का काम करते थे।
कंबोडिया और नेपाल से चल रहा था नेटवर्क
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि यह महज एक स्थानीय गैंग नहीं है, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले हैं। कंबोडिया और नेपाल में बैठे आकाओं के इशारे पर भारत में यह नेटवर्क काम कर रहा था। वाराणसी निवासी अरुण तिवारी, जो ‘शिवाज चैरिटेबल फाउंडेशन’ नाम का NGO चलाता है, डेटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में इस गैंग के लिए काम करता था। इन लोगों ने बुजुर्ग दंपती को कानून का डर दिखाकर हफ्तों तक डिजिटल अरेस्ट रखा और किश्तों में करोड़ों रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
लखनऊ और वाराणसी के आरोपियों की पूरी कुंडली
पुलिस ने 15 जनवरी से 21 जनवरी के बीच ताबड़तोड़ छापेमारी कर इन सभी को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में लखनऊ के भूपेंद्र मिश्रा और आदेश कुमार सिंह भी शामिल हैं। आदेश कुमार ट्यूशन पढ़ाने का काम करता था, जबकि अन्य आरोपी निजी कंपनियों में अच्छी नौकरियों पर थे। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने और कितने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है।