ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण आर्थिक और राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। देश की मुद्रा ‘रियाल’ (Rial) डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है, जिससे पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है। ईरान में महंगाई दर 40 प्रतिशत के पार जा चुकी है। रोजमर्रा की जरूरत की चीजें जैसे तेल, सब्जी और मांस के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे आम जनता के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है।
महंगाई की मार: तेहरान से शुरू हुआ विद्रोह का सैलाब
इस आर्थिक बदहाली से तंग आकर तेहरान के दुकानदारों ने हड़ताल कर दी, जिसने देखते ही देखते एक देशव्यापी आंदोलन का रूप ले लिया। महंगाई से परेशान लोग ईरान के कई शहरों में सड़कों पर उतर आए हैं। शुरुआत में यह विरोध प्रदर्शन बढ़ती कीमतों के खिलाफ था, लेकिन अब यह राजनीतिक मोड़ ले चुका है। लोग सड़कों पर नारेबाजी करते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) को पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।
हिंसा और तबाही: तीन हफ्तों में हजारों मौतें
विपक्ष और प्रदर्शनकारियों का यह गुस्सा अब हिंसक रूप ले चुका है। प्रदर्शन के दौरान गाड़ियों और सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया है। सुरक्षाबलों और आम जनता के बीच हो रही खूनी झड़पों ने स्थिति को बेहद तनावपूर्ण बना दिया है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले तीन हफ्तों के भीतर हुई इस हिंसा में हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। मानवाधिकार संगठनों ने इस दमनकारी कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई है।
1979 के बाद सत्ता को पहली बार मिली इतनी बड़ी चुनौती
ईरान के इतिहास पर नजर डालें तो साल 1979 की ‘इस्लामी क्रांति’ के बाद, जिसमें वहां के शाह को सत्ता से बेदखल कर दिया गया था, यह वर्तमान सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि आर्थिक तंगी और जनता के गुस्से का यह मेल मौजूदा शासन की जड़ें हिला सकता है। सरकार के लिए इस बार स्थिति को नियंत्रित करना आसान नहीं लग रहा है, क्योंकि विरोध की आवाज अब घर-घर से उठने लगी है।