नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चीन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। लद्दाख सीमा पर जारी तनाव और चीन के बढ़ते बुनियादी ढांचे को लेकर ओवैसी ने एक के बाद एक कई तीखे सवाल दागे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट साझा करते हुए पूछा कि क्या सरकार ने पड़ोसी देश के साथ कोई गुप्त “समझौता” किया है?
पेट्रोलिंग और ‘बफर जोन’ पर उठाए गंभीर सवाल
ओवैसी ने सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जवाब मांगते हुए पूछा कि क्या आज हमारी सेना उन सभी इलाकों में गश्त (patrolling) करने में सक्षम है, जहां वह अप्रैल 2020 से पहले जाया करती थी? उन्होंने ‘बफर जोन’ की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए और पूछा कि ये कब तक बने रहेंगे। ओवैसी ने आरोप लगाया कि सरकार ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के बारे में चीन के नजरिए को ही बफर जोन का आधार बना लिया है, जो देश की सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है।
‘चीन से इतना डर क्यों?’ – ओवैसी का तीखा हमला
एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका की रिपोर्ट का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा कि लद्दाख सीमा पर चीन का इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास 2020 के बाद से दोगुना हो गया है। उन्होंने सरकार से पूछा, “आप चीन से इतना डरे हुए क्यों हैं? हमारी सेना के गोलीबारी करने पर इतने प्रतिबंध क्यों लगा दिए गए हैं?” इसके साथ ही उन्होंने चीन और पाकिस्तान के बढ़ते सैन्य सहयोग पर भी चिंता जताई और सवाल किया कि अगर सरकार चीन को पाकिस्तान की मदद करने से नहीं रोक पा रही, तो फिर इस ‘दोस्ती’ का क्या मतलब है?
संसद में घमासान: 8 सांसद निलंबित
ओवैसी का यह हमला ऐसे समय में आया है जब संसद में सीमा विवाद को लेकर माहौल पहले से ही गर्म है। मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण का हवाला देने की कोशिश की गई, जिस पर भारी हंगामा हुआ। शोर-शराबे और “अशोभनीय व्यवहार” के आरोप में विपक्ष के 8 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है। ओवैसी ने मांग की है कि संसद को चलने दिया जाए ताकि विपक्ष सरकार से इन महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर जवाब मांग सके।