प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की ताकत दिखाने के लिए तैयार हैं। विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि पीएम मोदी 7 और 8 फरवरी 2026 को मलेशिया के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। अपनी इस यात्रा के दौरान वह मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में वहां के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम से मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री के तौर पर यह उनका मलेशिया का तीसरा दौरा होगा, जिसे कूटनीतिक और आर्थिक लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
कुआलालंपुर में सजेगा भारतीय समुदाय का मंच
पीएम मोदी का यह दौरा केवल सरकारी बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा। वह वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी रूबरू होंगे। आपको जानकर हैरानी होगी कि मलेशिया में करीब 29 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा भारतीय समुदाय है। पीएम मोदी की इस मुलाकात से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और भावनात्मक रिश्ते और भी मजबूत होंगे। साथ ही वह एक विशेष मलेशियाई फोरम में भी शिरकत करेंगे।
10वां भारत-मलेशिया सीईओ फोरम: व्यापार पर जोर
इस यात्रा का एक मुख्य आकर्षण 10वां भारत-मलेशिया सीईओ फोरम होगा। दोनों देशों के प्रधानमंत्री द्विपक्षीय चर्चा के साथ-साथ उद्योग और व्यापार जगत के दिग्गजों से भी संवाद करेंगे। इस फोरम का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक निवेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। जानकारों का मानना है कि इस मुलाकात से भारतीय कंपनियों के लिए मलेशिया में और मलेशियाई कंपनियों के लिए भारत में व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे।
रक्षा से लेकर डिजिटल टेक्नोलॉजी तक होगी बात
इस हाई-प्रोफाइल दौरे में चर्चा के मुद्दे काफी विस्तृत हैं। व्यापार और निवेश के अलावा रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग पर खास फोकस रहेगा। इतना ही नहीं, डिजिटल और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी, एनर्जी, हेल्थ, शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी आपसी सहयोग को बढ़ाने पर सहमति बनने की उम्मीद है। दोनों देश भविष्य की योजनाओं का एक ठोस खाका तैयार करेंगे, जिससे आने वाले सालों में रणनीतिक साझेदारी और गहरी हो सके।
साल 2024 की चर्चाओं को मिलेगा नया विस्तार
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी अगस्त 2024 में मलेशिया गए थे। उस दौरान दोनों देशों के रिश्तों को ‘कॉप्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ यानी समग्र रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर गहन चर्चा हुई थी। अब 2026 के इस दौरे में उसी साझेदारी को जमीन पर उतारने और नए आयाम जोड़ने की कोशिश की जाएगी। सदियों पुराने ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को अब आधुनिक युग की जरूरतों के हिसाब से ढाला जा रहा है।