प्रशासनिक लापरवाही पर गिरी गाज
पंजाब की भगवंत मान सरकार ने प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए दो वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। सस्पेंड किए गए अधिकारियों में उद्योग और वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक सचिव कमल किशोर यादव और पंजाब इंफोटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) जसप्रीत सिंह शामिल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निलंबन प्रशासनिक लापरवाही और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में हुई चूक के कारण किया गया है।
क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?
सूत्रों के मुताबिक, इस कार्रवाई की जड़ ‘आंगनबाड़ी स्टाफ को मोबाइल फोन देने की सरकारी योजना’ से जुड़ी है। इस योजना को लेकर एक निजी कंपनी ने अदालत से स्टे (Stay) हासिल कर लिया था, जिससे सरकार के काम में कानूनी बाधा आ गई। पंजाब सरकार का आरोप है कि संबंधित आईएएस अधिकारियों ने अदालत में इस मामले को ठीक ढंग से पेश नहीं किया, जिसके कारण सरकार को अड़चन झेलनी पड़ी। इसे भारी प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए सरकार ने दोनों अधिकारियों को सस्पेंड कर चंडीगढ़ मुख्यालय में रिपोर्ट करने के आदेश दिए हैं। इस दौरान उन्हें केवल निर्वाह भत्ता ही दिया जाएगा।
लक्की ओबोराय हत्याकांड से गरमाई राजनीति
एक तरफ प्रशासन में सख्ती दिख रही है, तो दूसरी तरफ पंजाब की कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेर लिया है। 6 फरवरी की सुबह जालंधर में आम आदमी पार्टी के नेता लक्की ओबोराय की सरेआम हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद पंजाब का सियासी माहौल बेहद गर्म है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
विपक्ष का दावा: जनवरी में हुईं 25 हत्याएं
सुखबीर बादल ने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी की ‘जीरो फियर’ सरकार में पंजाब खून से लथपथ हो गया है। उन्होंने दावा किया कि साल 2026 के पहले ही हफ्ते में 9 हत्याएं हुईं और अकेले जनवरी महीने में करीब 25 लोगों की जान जा चुकी है। विपक्ष के इन हमलों ने सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है, जबकि पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस की जांच में जुटी है।