नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सियासी सरगर्मी थमने का नाम नहीं ले रही है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने बंगाल के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाई है। मदनी ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों के साथ बराबरी और निष्पक्षता का व्यवहार करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री का पद संवैधानिक होता है और शपथ के अनुसार उन्हें हर वर्ग के साथ न्याय करना चाहिए।
संविधान और शपथ की याद
मौलाना मदनी ने अपने बयान में कहा कि मुख्यमंत्री ने पद की शपथ लेते समय यह वादा किया है कि वे बिना किसी पक्षपात के सभी लोगों के लिए काम करेंगे। उन्होंने आगाह किया कि सरकार को धर्म के आधार पर राजनीति करने से बचना चाहिए। मदनी ने मुख्यमंत्री के उस पुराने विवादित बयान पर भी गंभीर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने “सिर्फ हिंदुओं के लिए काम करने” की बात कही थी। मदनी ने स्पष्ट किया कि सत्ता में आने के बाद सरकार किसी एक समुदाय विशेष की नहीं, बल्कि पूरे राज्य की प्रतिनिधि होती है।
धर्म नहीं, विकास पर हो ध्यान
जमीयत प्रमुख ने कहा कि जनता को केवल धार्मिक नारों या विभाजन की राजनीति से मतलब नहीं है। आज के समय में लोगों की असल जरूरत विकास, बेहतर रोजगार, पक्की सड़कें, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और एक मजबूत कानून व्यवस्था है। उन्होंने सुवेंदु अधिकारी सरकार को सुझाव दिया कि उनका ध्यान इन बुनियादी मुद्दों पर होना चाहिए न कि समाज को धार्मिक आधार पर बांटने पर।
संविधान के रक्षकों को समर्थन का वादा
मौलाना मदनी ने अंत में यह साफ कर दिया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद का रुख हमेशा न्यायपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि जमीयत हर उस सरकार का समर्थन और सहयोग करेगी जो भारतीय संविधान के दायरे में रहकर काम करेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करेगी और न्याय के सिद्धांतों पर अडिग रहेगी, ताकि राज्य में शांति और सद्भाव का माहौल बना रहे।