जापान ने विज्ञान और तकनीक की दुनिया में एक ऐसी ऐतिहासिक सफलता हासिल की है, जिसने चीन की नींद उड़ा दी है। जापान को अपने एक सुदूर द्वीप के पास गहरे समुद्र के नीचे से ‘रेयर अर्थ’ (दुर्लभ खनिज) निकालने में बड़ी कामयाबी मिली है। वैज्ञानिकों ने समुद्र के तल से जो तलछट (Sediment) निकाला है, उसे “जादुई कीचड़” कहा जा रहा है। यह खोज जापान के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि अब उसे इन कीमती खनिजों के लिए चीन के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा।
6,000 मीटर नीचे से निकाला खजाना
जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि गहरे समुद्र में ड्रिलिंग करने वाले विशेष जहाज ‘चिक्यू’ ने मिनमिटोरिशिमा (मार्कस द्वीप) के पास समुद्र तल में 6,000 मीटर (लगभग 19,700 फीट) की गहराई तक ड्रिलिंग की। इतनी भीषण गहराई से दुर्लभ खनिजों को सफलतापूर्वक बाहर निकालने का यह दुनिया का पहला सफल परीक्षण है।
चीन की मनमानी पर लगेगा लगाम
रेयर अर्थ एलिमेंट्स का इस्तेमाल आज के दौर में स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), मिसाइल गाइडेंस सिस्टम और हाई-टेक गैजेट्स बनाने में होता है। वर्तमान में इन खनिजों की सप्लाई पर चीन का लगभग एकाधिकार है, जिसका इस्तेमाल वह अक्सर दूसरे देशों पर दबाव बनाने के लिए करता है। जापान को उम्मीद है कि इस “जादुई कीचड़” के मिल जाने से उसकी चीन पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। अगर जापान व्यावसायिक रूप से इसका उत्पादन शुरू कर देता है, तो वह खुद दुनिया का एक बड़ा सप्लायर बन सकता है।