अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने खाड़ी देशों में परमाणु हथियारों की संभावित होड़ को लेकर दुनिया को आगाह किया है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर ईरान परमाणु बम बनाने में कामयाब रहता है, तो सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश भी पीछे नहीं रहेंगे। वेंस ने इस पूरी स्थिति को एक खतरनाक न्यूक्लियर “दलदल” करार दिया है, जो पूरी दुनिया की शांति के लिए खतरा बन सकता है।
ईरान का परमाणु बम यानी सऊदी के अस्तित्व पर खतरा
अमेरिका को हमेशा से ईरान का कड़ा विरोधी और सऊदी अरब का करीबी सहयोगी माना जाता रहा है। सऊदी अरब और ईरान के बीच ऐतिहासिक दुश्मनी जगजाहिर है। वेंस का मानना है कि सऊदी अरब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने वजूद के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है। उन्होंने मेगिन केली के साथ बातचीत में कहा, “अगर ईरानियों को न्यूक्लियर हथियार मिल जाते हैं, तो आपको पता है कि अगले ही दिन कौन हथियार खरीदेगा? पहले सऊदी अरब और फिर एक-एक करके खाड़ी के तमाम अरब देश।”
ट्रंप सरकार की नीति: ‘कूटनीति पहली पसंद, लेकिन सैन्य विकल्प भी तैयार’
जेडी वेंस ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एजेंडे में दुनिया को परमाणु खतरों से मुक्त करना सबसे ऊपर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रंप 2000 के दशक में इराक युद्ध के दौरान हुई गलतियों को दोहराना नहीं चाहते, लेकिन ईरान को लेकर उनका रुख बेहद सख्त है। वेंस ने कहा, “ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते, यह हमारी घोषित नीति है।”
वेंस के मुताबिक, अमेरिका कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश करेगा ताकि ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था से फिर से जोड़ा जा सके। लेकिन उन्होंने चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि अगर गैर-सैन्य तरीके विफल रहते हैं, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति अपने सभी विकल्प खुले रखेंगे ताकि खाड़ी देशों को ‘न्यूक्लियर रेस’ की आग में झोंकने से रोका जा सके।